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जब चुंबक करेगा "पिंग पांग"

चुंबकीय क्षेत्र स्वरित रेडियो आवृत्ति दोलक के लिए एक अद्वितीय सैद्धांतिक तंत्र विकसित किया गया। प्रस्तावित उपकरण जब सिद्ध होगा तब वह, नैनोइलेक्ट्रानिक्स के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाएगा, विशेष रूप से फ्यूचरिस्टिक लॉजिक सर्किट में समाकलीय घड़ी के रूप में इसकी भूमिका उल्लेखनीय होगी।प्रत्येक सेकंड में उपकरण एक लॉजिक सर्किट में समाविष्ट होता है। हमारे दैनिक जीवन में स्मार्ट उपकरण ने महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। जिनमें शामिल हैं- स्मार्टफोन, ए.सी. रेफ्रिजरेटर, कैलक्युलेटर एवं हाल ही में आया स्मार्टऑटोमोबाइल, हालांकि सूची यहीं समाप्त नही हो जाती। इनमें से प्रत्येक उपकरणों का मुख्य हिस्सा लाजिक सर्किट से ही बनता है, जो हजारों प्रत्येक अलग घटकों या निर्माण करने वाले कारकों से मिलकर बने होते है। दोलक एक लॉजिक सर्किट का ऐसा ही एक घटक है। नव प्रस्तावित नैनोइलेक्ट्रॉनिक दोलक स्पिनट्रोनिक्स पर आधारित है, जो यदि जरूरी हुआ तो आपके उपकरण चुस्त-दुरूस्त, तीव्र एवं अधिक कार्यक्षम बन सकेगा। यह प्रस्ताव प्रा. भास्करन मुरलीधरन, प्रा. अश्विन तुलापुरकर एवं श्री. संचार शर्मा द्वारा विद्युत अभियांत्रिकी विभाग, भा.प्रौ.सं मुंबई में तैयार किया गया।दोलक एक सर्किट की तरह ही समझा जाता है जो आवर्ती दोलक संकेत उत्पन्न करता है। उदाहरणार्थ 2GH2PC के मदरबोर्ड पर एक दोलक, प्रत्येक 0.5 नैनोसेकण्ड के बाद विद्युत स्पंदन उत्पन्न करता है। प्रस्तावित तंत्र में दोलक चुंबकीय डोमेन भित्ति की गति से उत्पन्न हो जाता है।डोमेन भित्ति एक तनु अंतरापृष्ठ है, जो अणु समूहों को अलग करती है, जिनका भिन्न-भिन्न चुंबकीय संरेखण होता है। उपर्युक्त स्थितियों में भित्ति के लिए दोलक डोमेन भित्ति से प्रेरित हो सकते हैं। प्रा. मुरलीधरन एवं प्रा. तुलापुरकर ने स्पष्ट किया कि यह भित्ति दो अस्थाई स्थितियों के बीच आवर्ती के रूप से गतशील है, जैसे कि टेबल टेनिस का बॉल। दो खिलाडियों द्वारा गति दिए जानेवाले इस बाल की तरह चक्रण धारा स्पंद द्वारा चुंबकीय क्षेत्र आरोपित होता है और भित्ति के दूसरी ओर केवल चुंबकीय क्षेत्र होता है। ये दोलक विद्युत धाराओं द्वारा पढ़े जा सकते हैं और उसके बाद घड़ी के रूप में प्रयोग होते हैं।इलेक्ट्रॉन के तीन लक्षण होते हैं- प्रभार, द्रव्यमान एवं चक्रण। चक्रण यह संकेत करता है कि इलेक्ट्रान अपने अक्ष पर कितना चक्कर लगाते हैं। किसी भी क्षेत्र में घूमते हुए इलेक्ट्रॉन गतिशील आवेश के कारण विद्युत धारा उत्पन्न करते हैं। ये चक्रीय धारा दोलन उत्पन्न करने में उपयोग किए जाते हैं।अब टीम ने इस सिद्धांत को एक वास्तविक लाजिक सर्किट निर्मित करते हुए इसे साकार करना चाहता है। सभी चक्रिय नैनोमापन लाजिक्स प्रेरण को साकार करने में दोलकों का उपयोग करना एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इन चक्रीय नैनोमापन का प्रेरण चक्रीय धारा द्वारा होता है।इस उपकरण का संभाव्य लाभ उच्च गुणवत्ता, गति, परिशुद्धता एवं कम विद्युत खपत के रूप में है।

(This work was supported in part by IIT Bombay Seed Grant and the Department of Science and Technology (DST), Government of India under the Science and Engineering Board Grant.

The team acknowledges the support of the Centre of Excellence in Nanoelectronics (CEN), IIT Bombay.)

Sanchar Sharma, Bhaskaran Muralidharan, Ashwin Tulapurkar, Proposal for a Domain Wall Nano-Oscillator driven by Non-uniform Spin Currents, Nature Scientific Reports 5, Article number : 14647, (2015)DOI : 10.1038/srep14647

Patent : 3395/MUM2015

Write up prepared by (based on inputs from the authors) : Ajay Gupta, Sashwata Ghosh

Graphics by : Purushottam Gupta

www.iitb.ac.in/en/activities/media-cell

Research Domain: